उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum aae ho na shab-e-intizar guzri hai

तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है

تم آئے ہو نہ شب انتظار گزری ہے

शायर: Faiz Ahmad Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है
तलाश में है सहर बार बार गुज़री है

जुनूँ में जितनी भी गुज़री ब-कार गुज़री है
अगरचे दिल पे ख़राबी हज़ार गुज़री है

हुई है हज़रत-ए-नासेह से गुफ़्तुगू जिस शब
वो शब ज़रूर सर-ए-कू-ए-यार गुज़री है

वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है

चमन पे ग़ारत-ए-गुल-चीं से जाने क्या गुज़री
क़फ़स से आज सबा बे-क़रार गुज़री है