उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri zamin se uThenge to aasman honge

तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे

تری زمیں سے اٹھیں گے تو آسماں ہوں گے

शायर: Ibrahim Ashk7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे
हम ऐसे लोग ज़माने में फिर कहाँ होंगे

चले गए तो पुकारेगी हर सदा हम को
न जाने कितनी ज़बानों से हम बयाँ होंगे

लहू लहू के सिवा कुछ न देख पाओगे
हमारे नक़्श-ए-क़दम इस क़दर अयाँ होंगे

समेट लीजिए भीगे हुए हर इक पल को
बिखर गए जो ये मोती तो राएगाँ होंगे

उचाट दिल का ठिकाना किसी को क्या मालूम
हम अपने आप से बिछड़े तो फिर कहाँ होंगे

हैं अपनी मौज के बहते हुए समुंदर हम
तमाम दश्त-ए-जुनूँ में रवाँ-दवाँ होंगे

ये बज़्म-ए-यार है क़ुर्बान जाइए इस पर
सुना है 'अश्क' यहाँ दिल सभी जवाँ होंगे