उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gulshan mein le ke chal kisi sahra mein le ke chal

गुलशन में ले के चल किसी सहरा में ले के चल

گلشن میں لے کے چل کسی صحرا میں لے کے چل

शायर: Ibrahim Ashk4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुलशन में ले के चल किसी सहरा में ले के चल
ऐ दिल मगर सुकून की दुनिया में ले के चल

कोई तो होगा जिस को मिरा इंतिज़ार है
कहता है दिल के शहर-ए-तमन्ना में ले के चल

ये प्यास बुझ न पाई तो मैं डूब जाऊँगा
साहिल से दूर तू मुझे दरिया में ले के चल

पहचानता नहीं है मिरा नाम 'क़ैस' भी
ऐ ख़िज़्र-ए-राह कूचा-ए-लैला में ले के चल