उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri talKHi ko chakhun ya tere husn-e-maani ko

तिरी तल्ख़ी को चखूँ या तिरे हुस्न-ए-मआ'नी को

تری تلخی کو چکھوں یا ترے حسن معانی کو

शायर: Faisal Azeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी तल्ख़ी को चखूँ या तिरे हुस्न-ए-मआ'नी को
किताब-ए-ज़िंदगी किस ने लिखा मेरी कहानी को

तो सर-ता-पा कोई फ़ित्ना भी है शहकार-ए-फ़ितरत भी
मगर मैं ज़िंदगी के नाम कर आया जवानी को

ये किरनें फूटती हैं जो तिरे चाक-ए-गरेबाँ से
उन्ही के नूर से लिक्खा गया मेरी कहानी को

ये कब जाना किसी ने ऐ मुजस्सम राज़ तू क्या है
कि फ़ितरत ने कोई मरमर तराशा गुल-फ़िशानी को

कहीं ज़ख़्मी सदाएँ हैं कहीं नग़्मे मोहब्बत के
तू किस की सम्त मोड़ा जाए अब के ज़िंदगानी को