उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri rahmaton ka talib mujhe aas tere dar se

तिरी रहमतों का तालिब मुझे आस तेरे दर से

تری رحمتوں کا طالب مجھے آس تیرے در سے

शायर: Ejaz Parwana6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी रहमतों का तालिब मुझे आस तेरे दर से
ये क़दम बहक न जाए मिरी मुफ़्लिसी के डर से

है तवंगरों का मेला तू ग़रीब है अकेला
तिरा दिल न टूट जाए तू अभी न जा उधर से

कई जाम ख़ाली करके वो अभी भी होश में हैं
मैं नशे में हूँ क़सम से मैं ने पी जो ली नज़र से

उसे ख़ौफ़ ने किनारे पे पहुँचने न दिया था
मुझे मिल गया था साहिल मिरे हौसलों के डर से

नहीं बर्ग-ओ-गुल हैं जिन पर वही तन के सब खड़े हैं
वो शजर तो फ़ैज़ वाला है झुका हुआ समर से

मिरे ग़म-गुसार तुझ को तिरी रहबरी मुबारक
मैं ख़ुद अपना रहनुमा हूँ मुझे काम है सफ़र से