उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri nigah ka chubhta hua sawal mujhe

तिरी निगाह का चुभता हुआ सवाल मुझे

تری نگاہ کا چبھتا ہوا سوال مجھے

शायर: Habeeb Ahmar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी निगाह का चुभता हुआ सवाल मुझे
कहीं न ग़म के समुंदर में दे उछाल मुझे

मैं एक लम्हा-ए-कमज़ोर के हिसार में हूँ
शिकस्तगी न कहीं कर दे पाएमाल मुझे

बिखरने वाला हूँ मौसम की गर्म साँसों से
निहाल-ए-सब्ज़ तू बाहों में अब सँभाल मुझे

मैं एक क़तरा-ए-शबनम मिरा वजूद ही क्या
किरन की नोक ही कर देगी पाएमाल मुझे

शजर से बर्ग-ए-गुल-ए-ज़र्द ने कहा 'अह्मर'
करम तिरा कि तू समझे शरीक-ए-हाल मुझे