उर्दू शायरी · ग़ज़ल

DhunDne nikle the apna nam kis arman se

ढूँडने निकले थे अपना नाम किस अरमान से

ڈھونڈنے نکلے تھے اپنا نام کس ارمان سے

शायर: Habeeb Ahmar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ढूँडने निकले थे अपना नाम किस अरमान से
हम सदाओं के नगर में रह गए अंजान से

उँगलियाँ यादों की थामे हम गुज़रते ही गए
रास्ते में मोड़ मिलते ही गए सुनसान से

दे रहा हूँ 'उम्र के हासिल को अफ़्साने का रूप
टूटते लम्हे बिखरती रेत के 'उन्वान से

दोस्तों ने शह भी दी हुशियार थे हम भी मगर
फ़ील घोड़े पिट गए फिर भी रहे अंजान से

वक़्त की जब धूप 'अह्मर' चढ़ गई दीवार पर
अपना साया देख के हम रह गए हैरान से