उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har ek abr ke TukDe ko baal-o-par dega

हर एक अब्र के टुकड़े को बाल-ओ-पर देगा

ہر ایک ابر کے ٹکڑے کو بال و پر دے گا

शायर: Habeeb Ahmar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर एक अब्र के टुकड़े को बाल-ओ-पर देगा
शजर शजर को ये मौसम नया समर देगा

वो मेरी क़ब्र पे इक मुश्त-ए-ख़ाक दे आया
जिसे था दावा के माँगूँ तो बहर-ओ-बर देगा

निहाल-ए-दर्द को अश्कों से सींचते रहना
ग़मों की धूप में साया यही शजर देगा

पता शुऊ'र की तह में छुपे सदफ़ का हमें
हमारी ज़ात में बनता हुआ भँवर देगा

ख़याल-ओ-फ़िक्र को तेरी नई क़बा 'अह्मर'
ये हर्फ़-ओ-सौत नहीं बस तिरा हुनर देगा