उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri nazar ke ishaaron ko dil-kashi baKHshi

तिरी नज़र के इशारों को दिल-कशी बख़्शी

تری نظر کے اشاروں کو دلکشی بخشی

शायर: Qaisar Nizami6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी नज़र के इशारों को दिल-कशी बख़्शी
नज़र-नवाज़ नज़ारों को ताज़गी बख़्शी

ख़िज़ाँ की ज़द में ही अब तक तिरा गुलिस्ताँ था
हमीं ने आ के बहारों को ज़िंदगी बख़्शी

चमन को हम ने ही अपने लहू से सींचा है
कली को हम ने ही इक तर्ज़-ए-दिल-कशी बख़्शी

तिरी अदा भी अदा है वो इक क़यामत की
ये और बात है तारों को दिल-कशी बख़्शी

है ज़ोम चाक-ए-गिरेबाँ को अपनी क़िस्मत पर
कि तुम ने क्यूँ न मजाल-ए-रफ़ू-गरी बख़्शी

सुना दो अहल-ए-वफ़ा को ये फ़ल्सफ़ा 'क़ैसर'
जुनूँ ने होश की दुनिया को आगही बख़्शी