उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere KHayal aur tere dhiyan se pare ka hun

तिरे ख़याल और तिरे धियान से परे का हूँ

ترے خیال اور ترے دھیان سے پرے کا ہوں

शायर: Tahzeeb Hafi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे ख़याल और तिरे धियान से परे का हूँ
मैं ज़ाइक़ा हूँ और तिरी ज़बान से परे का हूँ

मिरे लिए नहीं बनी हैं ये समय की सीढ़ियाँ
सो मैं अतीत और वर्तमान से परे का हूँ

तू कौन है कि जो मुझे मिरे हदफ़ बताएगा
मैं तीर हूँ मगर तिरी कमान से परे का हूँ

अगर नहीं हूँ मैं तो फिर वुजूद क्या शु'ऊर क्या
अगर मैं हूँ तो फिर मैं इस जहान से परे का हूँ

अगर चलूँ तो दो क़दम के बा'द ये ज़मीं नहीं
अगर उड़ूँ तो तेरे आसमान से परे का हूँ

कहा था मेरे आगे अपनी नज़्म पेश मत करो
कि मैं तुम्हारे शे'री ख़ानदान से परे का हूँ