उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tera chehra subh ka tara lagta hai

तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है

تیرا چہرہ صبح کا تارا لگتا ہے

शायर: Kaif Bhopali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है

रात हमारे साथ तू जागा करता है
चाँद बता तू कौन हमारा लगता है

किस को ख़बर ये कितनी क़यामत ढाता है
ये लड़का जो इतना बेचारा लगता है

तितली चमन में फूल से लिपटी रहती है
फिर भी चमन में फूल कँवारा लगता है

'कैफ़' वो कल का 'कैफ़' कहाँ है आज मियाँ
ये तो कोई वक़्त का मारा लगता है