उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tazkira itna mera uske fasane mein hua

तज़्किरा इतना मिरा उस के फ़साने में हुआ

تذکرہ اتنا مرا اس کے فسانے میں ہوا

शायर: Jafar Shirazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तज़्किरा इतना मिरा उस के फ़साने में हुआ
मैं जुनूँ के नाम पर रुस्वा ज़माने में हुआ

मुझ को दुनिया ने मिटाने में न कुछ ताख़ीर की
किस क़यामत का तसाहुल तेरे आने में हुआ

आज तक हैं ज़िंदगी की किर्चियाँ बिखरी हुईं
इक ज़रा सा वाक़िआ' आईना-ख़ाने में हुआ

अब भी उस को याद आता है तो मर जाता है वो
उस का जो लम्हा बसर मेरे भुलाने में हुआ

सारी दुनिया के लिए मेरा हवाला बन गए
फ़ाएदा क्या आप को मेरे मिटाने में हुआ

दोस्तो ज़ैतून की शाख़ें लिए फिरता हूँ मैं
तज्रबा मुझ को यही तो ज़ख़्म खाने में हुआ

ज़िंदगी-भर उस से मिल बैठे न 'जाफ़र' बात की
और क़िस्सा ख़त्म यूँही आने-जाने में हुआ