उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tashrif shab-e-wada jo wo lae hue hain

तशरीफ़ शब-ए-वा'दा जो वो लाए हुए हैं

تشریف شب وعدہ جو وہ لائے ہوئے ہیں

शायर: Kalb-e-husain Nadir4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तशरीफ़ शब-ए-वा'दा जो वो लाए हुए हैं
सर ख़म है नज़र नीची है शरमाए हुए हैं

रुख़ पर जो सियह-ज़ुल्फ़ को को बिखराए हुए हैं
वो चौदहवीं के चाँद हैं गहनाए हुए हैं

फूलों से सिवा है बदन-ए-पाक में ख़ुशबू
कब 'इत्र लगाने से वो इतराए हुए हैं

हम्माम में जाने के लिए क्या कहे कोई
वो तो अरक़-ए-शर्म में नहलाए हुए हैं