उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil aankhon se aashiq bachae hue hain

दिल आँखों से आशिक़ बचाए हुए हैं

دل آنکھوں سے عاشق بچائے ہوئے ہیں

शायर: Kalb-e-husain Nadir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल आँखों से आशिक़ बचाए हुए हैं
हिरन को वो चीता बनाए हुए हैं

नहीं लिखते हैं ख़त जो हम को वो क़ासिद
किसी के सिखाए पढ़ाए हुए हैं

न ख़ंजर उठेगा न तलवार उन से
वो बाज़ू मिरे आज़माए हुए हैं

अगर उन को पूजा तो क्या कुफ़्र होगा
कि बुत भी ख़ुदा के बनाए हुए हैं

कोई बाँधो न बाँधे अब कुछ न होगा
कि हम रंग अपना जमाए हुए हैं

हज़ज में भी अशआर ऐ 'नादिर' अब पढ़
कि बज़्म-ए-सुख़न में सब आए हुए हैं