उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tark ulfat mein bhi usne ye riwayat rakkhi

तर्क उल्फ़त में भी उस ने ये रिवायत रक्खी

ترک الفت میں بھی اس نے یہ روایت رکھی

शायर: Yashab Tamanna5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तर्क उल्फ़त में भी उस ने ये रिवायत रक्खी
रोज़ मिलने की पुरानी वही 'आदत रक्खी

तू गया है तो पलट कर नहीं पूछा मैं ने
वर्ना बरसों तिरी यादों की अमानत रक्खी

कल अचानक कोई तस्वीर बनी काग़ज़ पर
मुद्दतों सब से छुपा कर तेरी सूरत रक्खी

वो मुक़द्दर में नहीं है तो उसी के दिल में
किस ने हर शय से ज़ियादा मिरी चाहत रक्खी

ख़ुद ही मिलता है बिछड़ता है 'यशब' अपने लिए
आने-जाने की 'अजब उस ने सुहूलत रक्खी