उर्दू शायरी · ग़ज़ल

asrar kaise khol dun us aab-o-gil ke main

असरार कैसे खोल दूँ उस आब-ओ-गिल के मैं

اسرار کیسے کھول دوں اس آب و گل کے میں

शायर: Yashab Tamanna6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

असरार कैसे खोल दूँ उस आब-ओ-गिल के मैं
महका हुआ हूँ रात की रानी से मिल के मैं

क्या जानिए कि कैसे पता चल गया उसे
कहता नहीं किसी से भी अहवाल दिल के मैं

ख़ाक-ए-शिफ़ा कहीं की भी आई नहीं है रास
अब आसमान पर कहीं देखूँगा खिल के मैं

अब भी वही है प्यास की शिद्दत वही हूँ मैं
पानी तो पहले भी नहीं पीता था हिल के मैं

चेहरे से लग रहा था कि पज़मुर्दगी सी है
नख़रे उठा रहा हूँ दिल-ए-मुज़्महिल के मैं

दमड़ी नहीं है जेब में लेकिन ये दिल तो है
कोई भी दाम दूँगा 'यशब' उस के तिल के मैं