उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-mehr talluq tha juda hona tha ek din

बे-मेहर तअ'ल्लुक़ था जुदा होना था इक दिन

بے مہر تعلق تھا جدا ہونا تھا اک دن

शायर: Yashab Tamanna5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-मेहर तअ'ल्लुक़ था जुदा होना था इक दिन
जो कुछ भी मिरे साथ हुआ होना था इक दिन

कुछ हम ही फ़रेबों में गिरफ़्तार रहे थे
उस ने तो बहर-हाल जुदा होना था इक दिन

अब इतना भी संगीन मिरा जुर्म नहीं था
इस क़ैद से आख़िर तो रिहा होना था इक दिन

यूँही तो कभी हर्फ़-ए-शिकायत नहीं निकला
इस दर्द ने आख़िर तो दवा होना था इक दिन

तुम शाइरी करते हो 'यशब' इस लिए तुम को
अब दर्द का तोहफ़ा तो अता होना था इक दिन