उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taza-dam jazba-e-safar rakkha

ताज़ा-दम जज़्बा-ए-सफ़र रक्खा

تازہ دم جذبۂ سفر رکھا

शायर: Tabish Dehlvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ताज़ा-दम जज़्बा-ए-सफ़र रक्खा
हम ने मंज़िल को रहगुज़र रक्खा

एहतिराम-ए-रह-ए-तलब देखो
पावँ रखना था हम ने सर रक्खा

तेरे इक जल्वा-ए-तबस्सुम को
ज़िंदगी ने सहर सहर रक्खा

तेरी आगाही-ए-मोहब्बत ने
हम को तुझ से भी बे-ख़बर रक्खा

आज बज़्म-ए-ख़याल में हम ने
देर तक उन को जल्वा-गर रक्खा

'अक़्ल ने मेरी गुम-रही के लिए
हर क़दम 'आलम-ए-ख़बर रक्खा

हम ने इस हसरत-ए-तमाशा में
नाम जल्वे का भी नज़र रक्खा

अपनी रुस्वाइयों के पर्दे में
हम ने किस किस को मो'तबर रक्खा

अब हुनर 'ऐब है मगर 'ताबिश'
हम ने इस 'ऐब को हुनर रक्खा