उर्दू शायरी · ग़ज़ल

suno tum ghaur se thoDi si hai ye dastan meri

सुनो तुम ग़ौर से थोड़ी सी है ये दास्ताँ मेरी

سنو تم غور سے تھوڑی سی ہے یہ داستاں میری

शायर: Vafa Barahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुनो तुम ग़ौर से थोड़ी सी है ये दास्ताँ मेरी
नहीं चलती बयान-ए-शौक़ पर हरगिज़ ज़बाँ मेरी

तबस्सुम और फिर बर्क़-ए-तबस्सुम उफ़ मआ'ज़-अल्लाह
छुपी है ज़िंदगी भर की इसी में दास्ताँ मेरी

पयाम-ए-शौक़ दे कर वो बुलाएँगे मुझे ऐ दिल
ख़याल-ए-ख़ाम तेरा है ये क़िस्मत है कहाँ मेरी

किसी की चश्म-ए-मयगूँ में सुरूर-ए-हुस्न रक़्साँ है
हया ख़ामोश फ़ितरत है तमन्ना है जवाँ मेरी

फ़ना के भेस में पिन्हाँ तिरा अंजाम-ए-हस्ती है
यही कहती रही मुझ से 'वफ़ा' उम्र-ए-रवाँ मेरी