उर्दू शायरी · ग़ज़ल

suno mera KHayal hai

सुनो मिरा ख़याल है

سنو مرا خیال ہے

शायर: Tabinda Sahar Abidi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुनो मिरा ख़याल है
ये ज़िंदगी वबाल है

अजीब बे-रुख़ी सी है
बड़ा ख़राब हाल है

न गुफ़्तुगू में शोख़ियाँ
न सुर रहा न ताल है

कभी ख़ुदा कभी सनम
ये कैसा गोल-माल है

मोहब्बतों की आड़ में
हवस का एक जाल है

बहार है गुरेज़-पा
दिलों का ख़स्ता हाल है

गँवा दिया है सोज़-ए-दिल
कि पत्थरों सा हाल है

ज़माना बे-मिसाल था
ज़माना बे-मिसाल है

किसी की चाह में 'सहर'
उरूज भी ज़वाल है