उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq qasdan kiya nahin jata

इश्क़ क़स्दन किया नहीं जाता

عشق قصداً کیا نہیں جاتا

शायर: Tabinda Sahar Abidi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ क़स्दन किया नहीं जाता
दिल भी क़स्दन दिया नहीं जाता

हम ने आब-ए-हयात जाना था
ये हलाहल पिया नहीं जाता

जिस्म-ए-ज़िंदाँ में रूह क़ैदी है
इस घुटन में जिया नहीं जाता

साँस लेने में भी थकन है अब
ज़ख़्म-ए-दिल अब सिया नहीं जाता

है गला दिल-ख़राश चीख़ों से
मातम-ए-दिल किया नहीं जाता

कैसे लफ़्ज़ों में ग़म नज़र आए
ख़ाका-ए-ग़म लिखा नहीं जाता

'सहर' आँखों में है वो तुग़्यानी
ये समुंदर पिया नहीं जाता