उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sote se wo jag paDa hai

सोते से वो जाग पड़ा है

سوتے سے وہ جاگ پڑا ہے

शायर: Qamar Siddiqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोते से वो जाग पड़ा है
ख़्वाबों का नुक़सान हुआ है

हम भी घर में आ बैठे हैं
रस्ता भी सुनसान पड़ा है

बच्चे पब-जी खेल रहे हैं
बूढ़ा बरगद देख रहा है

पारक की सूनी बेंचों पर
शाम का साया फैल रहा है

तन्हाई की गहरी धूप में
तेरी याद का फूल खिला है

अंदर आ कर देख कभी तू
याँ पूरा इक शहर बसा है

जीवन या'नी खेल-तमाशा
जितना देखा उतना बचा है