उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari nind koi so gaya hai kya

हमारी नींद कोई सो गया है क्या

ہماری نیند کوئی سو گیا ہے کیا

शायर: Qamar Siddiqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी नींद कोई सो गया है क्या
जो था ख़्वाबों का ज़ेवर खो गया है क्या

सभी चेहरों पे है क्यों बद-हवासी अब
सभी का जैसे याँ कुछ खो गया है क्या

कोई फ़रियाद अब सुनता नहीं वो भी
कहीं पर चीफ़ जस्टिस हो गया है क्या

ये क्यों तालाब दरिया और समुंदर हैं
यहाँ पर कोई आ कर रो गया है क्या

'क़मर' का आइने में सिर्फ़ चेहरा है
सरापा भीड़ में अब खो गया है क्या

यूँ ही शादाब चेहरा हो नहीं सकता
छलक कर अश्क चेहरा धो गया है क्या

उगे हैं चार-सू नफ़रत के पौदे क्यों
दिलों में ज़ह्र कोई बो गया है क्या