उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shoala jalta hua sard si sham mein

शो'ला जलता हुआ सर्द सी शाम में

شعلہ جلتا ہوا سرد سی شام میں

शायर: Lubna Safdar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शो'ला जलता हुआ सर्द सी शाम में
मन पिघलता हुआ सर्द सी शाम में

वहशतों ने रग-ए-जाँ को काटा है ख़ूब
दुख मसलता हुआ सर्द सी शाम में

आसमानों पे रंगों के मेले भी थे
दिन था ढलता हुआ सर्द सी शाम में

कौन था दश्त में संग मेरे कहो
साथ चलता हुआ सर्द सी शाम में

बे-ख़ुदी को कहूँ क्या मैं अपना बदन
देखूँ ढलता हुआ सर्द सी शाम में