उर्दू शायरी · ग़ज़ल

poron poron zaKHm hui hun

पोरों पोरों ज़ख़्म हुई हूँ

پوروں پوروں زخم ہوئی ہوں

शायर: Lubna Safdar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पोरों पोरों ज़ख़्म हुई हूँ
ख़्वाबों की सीढ़ी से गिरी हूँ

कासा मिरा है हर्फ़-ए-तसल्ली
करम का सिक्का माँग रही हूँ

साए में उस के बैठना चाहूँ
सदियों से मैं थकी हुई हूँ

राह के जिस ने ख़ार चुने थे
दिल से उस की आज हुई हूँ

चेहरे पर है गर्द का शीशा
अंदर से मैं चमक रही हूँ