उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh kahte zarur un se goyai nahin baqi

कुछ कहते ज़रूर उन से गोयाई नहीं बाक़ी

کچھ کہتے ضرور ان سے گویائی نہیں باقی

शायर: Lubna Safdar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ कहते ज़रूर उन से गोयाई नहीं बाक़ी
सूरत तो हसीं होगी बीनाई नहीं बाक़ी

दुख-दर्द की साथी थी मिलना है मुहाल उस का
इक हश्र सा बरपा है तन्हाई नहीं बाक़ी

अब दिल में है क्या मेरे इस बात को तुम छोड़ो
इस राह-ए-मोहब्बत में पस्पाई नहीं बाक़ी

हालात की शिद्दत ने झुलसाए बदन ऐसे
चेहरे की ज़िया रुख़्सत ज़ेबाई नहीं बाक़ी

कुछ रंग-ए-ख़िज़ाँ ने भी गुल ऐसे खिलाए हैं
लहजों में कहीं भी तो रानाई नहीं बाक़ी