उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shahr ki rut badalne wali hai

शहर की रुत बदलने वाली है

شہر کی رت بدلنے والی ہے

शायर: Jai Shree Thakur Shafaq7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शहर की रुत बदलने वाली है
कोई सूरत निकलने वाली है

आस का आफ़्ताब चमका है
ये सियह रात ढलने वाली है

अब मुरादों को पूरी कर भी दे
अब तमन्ना मचलने वाली है

फ़ुर्क़त-ए-शब है और हम हैं बस
दर्द की शम्अ' जलने वाली है

ये सदा-ए-जरस है सुब्ह की दोस्त
जो अंधेरा निगलने वाली है

इश्क़ में साथ मिल गया है अब
हर बला सर से टलने वाली है

रंग सूरज का ले के बादल से
अब 'शफ़क़' भी निकलने वाली है