उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shahad mein Dube hue kaDwe karele mustarad

शहद में डूबे हुए कड़वे करेले मुस्तरद

شہد میں ڈوبے ہوئے کڑوے کریلے مسترد

शायर: Tabassum Azmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शहद में डूबे हुए कड़वे करेले मुस्तरद
जो भी कहिए साफ़ कहिए पेच लच्छे मुस्तरद

चप्पे चप्पे पर उगाएँगे मोहब्बत के गुलाब
नफ़रतों के रोड़े पत्थर कील काँटे मुस्तरद

दीन-बाज़ी और शय है दीन-दारी और चीज़
दीन के जुब्बे में लिपटे ढोंग सारे मुस्तरद

जिन की बुनियादें ग़रज़ की रेत पर रक्खी गईं
इस तरह के सब त'अल्लुक़ रिश्ते नाते मुस्तरद

चापलूसी और ख़ुशामद से इबारत जो भी हैं
साफ़ कहती है 'तबस्सुम' ये शुमारे मुस्तरद