उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham ko usne meri KHatir sajna chhoD diya

शाम को उस ने मेरी ख़ातिर सजना छोड़ दिया

شام کو اس نے میری خاطر سجنا چھوڑ دیا

शायर: Yashab Tamanna5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाम को उस ने मेरी ख़ातिर सजना छोड़ दिया
मैं ने भी दफ़्तर से जल्दी आना छोड़ दिया

कब तक उस के हिज्र में आँखें रोतीं आख़िर को
दरिया ने भी अपने रुख़ पर बहना छोड़ दिया

पहले पहले हम ने कहना सुनना छोड़ा था
होते होते हम ने बातें करना छोड़ दिया

उस ने ख़्वाब में आने की उम्मीद बँधाई है
हिज्र की शब को मैं ने तारे गिनना छोड़ दिया

जब से अपने दिल के उस ने ज़ख़्म दिखाए हैं
मैं ने भी मोनिस से बातें करना छोड़ दिया