उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar-e-rahe kabhi-kabhaar sahi

सर-ए-राहे कभी-कभार सही

سر راہے کبھی کبھار سہی

शायर: A G Josh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर-ए-राहे कभी-कभार सही
रस-भरी इक निगाह-ए-यार सही

हम तो ज़िंदा हैं तेरे वा'दों पर
तू नहीं तेरा इंतिज़ार सही

हम लगा देंगे इश्क़ की बाज़ी
न मिले जीत अपनी हार सही

हम को है एक सोहनी की तलाश
पस-ए-तूफ़ाँ चनाब पार सही

अपना मंसब निभा कि तू है ख़ुदा
हम हैं बंदे गुनाहगार सही