उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sajan mujh par bahut na-mehrban hai

सजन मुझ पर बहुत ना-मेहरबाँ है

سجن مجھ پر بہت نا مہرباں ہے

शायर: Faez Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सजन मुझ पर बहुत ना-मेहरबाँ है
कहाँ वो आशिक़ाँ का क़दर-दाँ है

कहूँ अहवाल दिल का उस को क्यूँकर
बहुत नाज़ुक-मिज़ाज ओ बद-ज़बाँ है

मिरा दिल बंद है उस नाज़नीं पर
'अजब उस ख़ुश-लिक़ा में एक आँ है

भवाँ शमशीर हैं ओ ज़ुल्फ़ फाँसी
हर इक पलक उस की मानिंद-ए-सिनाँ है

ख़ुदा उस को रखे दुनिया में महफ़ूज़
निहाल-ए-आरज़ू आराम-ए-जाँ है

चंद्र बे-वक़र है उस बद्र आगे
सफ़ा उस मुख की हर इक पर 'अयाँ है

समझता है तिरे अश’आर 'फ़ाएज़'
ख़ुदा के फ़ज़्ल सूँ वो नुक्ता-दाँ है