उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sahba-e-nazar ke is chhalkane ko kya kahiye

सहबा-ए-नज़र के इस छलकाने को क्या कहिए

صہبائے نظر کے اس چھلکانے کو کیا کہئے

शायर: Lalan Chaudhary7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सहबा-ए-नज़र के इस छलकाने को क्या कहिए
उस शोख़ की आँखों के पैमाने को क्या कहिए

यूँ बर्क़ ने फूँका है सब ख़ाक हुए सपने
बरबाद नशेमन के अफ़्साने को क्या कहिए

दे कर ग़म-ए-दिल अब वो बीमार-ए-मोहब्बत को
समझाते हैं उन के इस समझाने को क्या कहिए

ये सोज़-ए-मोहब्बत है जब शम्अ' हुई रौशन
जल जाता है चुपके से परवाने को क्या कहिए

बैठा है अभी आ कर उठ कर अभी चल देगा
दीवाना है दीवाना दीवाने को क्या कहिए

हाथों में लिए पत्थर फिरते हैं मिरे पीछे
अपनों की ये हालत है बेगाने को क्या कहिए

रोना मुझे आता है हालत पे तिरी 'आफ़त'
घर की जो ये सूरत है वीराने को क्या कहिए