उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ruKH jo badla gham-e-zindagi ne

रुख़ जो बदला ग़म-ए-ज़िंदगी ने

رخ جو بدلا غم زندگی نے

शायर: Mahboob Khan Raunaq5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रुख़ जो बदला ग़म-ए-ज़िंदगी ने
मुझ को अपना लिया मय-कशी ने

मौज-ए-तूफ़ाँ में था कौन अपना
आ के साहिल पे पूछा सभी ने

खुल ही जाता था राज़-ए-ख़ुदाई
वो तो रोका हद-ए-बंदगी ने

शाम से सुब्ह तक कोई पूछे
क्या दिया शम्अ को रौशनी ने

वर्ना पहचानता कौन 'रौनक़'
मुझ को रुस्वा किया शाइरी ने