उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rang-o-nam-o-nasl ke jhagDe miTa lije zara

रंग-ओ-नाम-ओ-नस्ल के झगड़े मिटा लीजे ज़रा

رنگ و نام و نسل کے جھگڑے مٹا لیجے ذرا

शायर: Saadullah Khan Asar Malkapur5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंग-ओ-नाम-ओ-नस्ल के झगड़े मिटा लीजे ज़रा
हम गले मिल लेंगे ये पर्दे उठा लीजे ज़रा

ज़ुल्फ़ की रुख़्सार की सुनने को तब जी चाहेगा
आइना आप अपने चेहरे को दिखा लीजे ज़रा

गुल की बुलबुल की बहारों की चमन की फिर कभी
उजड़े उजड़े आशियाँ पहले बसा लीजे ज़रा

उँगलियाँ फिर मेरी जानिब शौक़ से लेना उठा
अपने दामन पर लगे धब्बे मिटा लीजे ज़रा

आप की अदना दुआओं में भी आएगा 'असर'
दोनों हाथों को अक़ीदत से उठा लीजे ज़रा