उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maine tumko kya samjha hai aisa tumne socha kya

मैं ने तुम को क्या समझा है ऐसा तुम ने सोचा क्या

میں نے تم کو کیا سمجھا ہے ایسا تم نے سوچا کیا

शायर: Saadullah Khan Asar Malkapur5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ने तुम को क्या समझा है ऐसा तुम ने सोचा क्या
तुम कैसे हो तुम क्या क्या हो आईना भी देखा क्या

मुझ से बेहतर होंगे लाखों मैं लाखों में बेहतर हूँ
इस उलझन में पड़ना भी क्या इस उलझन में रक्खा क्या

मंदिर मस्जिद बनना गिरना सब मतलब की बातें हैं
दोनों ही अल्लाह के घर हैं कौन बताए अच्छा क्या

कब तक झूटी आस पे जी के दिल के फफूले फोड़ेगा
ख़ुद्दारी को बेचने वाले आख़िर तेरा होगा क्या

हम ने माना बस्ती बस्ती आज 'असर' का चर्चा है
उस बादल का ज़िक्र न कीजे जो गरजा वो बरसा क्या