उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rast agar sarw si qamat kare

रास्त अगर सर्व सी क़ामत करे

راست اگر سرو سی قامت کرے

शायर: Faez Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रास्त अगर सर्व सी क़ामत करे
यार की आँखों में क़यामत करे

पानी होवे आरसी उस मुख को देख
ज़ोहरा उसे क्या कि इक़ामत करे

तूर मिरी अक़्ल-ओ-ख़िरद से है दूर
मुझ को सबी ख़ल्क़ मलामत करे

छब हुए जिस शख़्स को तुझ माह सी
सर्व-क़दाँ बीच इमामत करे

दहर में 'फ़ाएज़' सा नहीं एक तन
इश्क़ के क़ानून में क़यामत करे