उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah-e-ulfat ki aan baqi hai

राह-ए-उल्फ़त की आन बाक़ी है

راہ الفت کی آن باقی ہے

शायर: Vafa Barahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राह-ए-उल्फ़त की आन बाक़ी है
कुछ मिटी कुछ तकान बाक़ी है

आह-ए-सोज़ाँ ने सब को फूँक दिया
किस तरह आसमान बाक़ी है

ज़ख़्म-ए-दिल मुंदमिल हुआ लेकिन
एक धुँदला निशान बाक़ी है

न जिगर है न दिल है पहलू में
साँस चलती है जान बाक़ी है

जान दे दो 'वफ़ा' मोहब्बत में
आख़िरी इम्तिहान बाक़ी है