उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qissa-e-naql kuchh aisa hai batae na bane

क़िस्सा-ए-नक़्ल कुछ ऐसा है बताए न बने

قصۂ نقل کچھ ایسا ہے بتائے نہ بنے

शायर: Kaif Ahmed Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़िस्सा-ए-नक़्ल कुछ ऐसा है बताए न बने
बात बिगड़ी है कुछ ऐसी कि बनाए न बने

इम्तिहाँ हाल में हम लाए हैं इक ऐसी किताब
मुम्तहिन पूछे ये क्या है तो छुपाए न बने

इन किताबों से है पीछा भी छुड़ाना मुश्किल
और ये बोझ भी अब हम से उठाए न बने

क्या करें खेल में कम-बख़्त कशिश है ऐसी
जिस से दिल अपना हटाएँ तो हटाए न बने

सुब्ह को आँख भी खुलती नहीं जल्दी अपनी
देर हो जाए तो इस्कूल भी जाए न बने

घर से भी सेनिमा जाने की इजाज़त न मिली
और इस्कूल से भी भाग के आए न बने

'कैफ़' ख़ामोश रहा भी नहीं जाता मुझ से
और दर्जे में ग़ज़ल गाएँ तो गाए न बने