उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qalam ko is liye talwar karna

क़लम को इस लिए तलवार करना

قلم کو اس لئے تلوار کرنا

शायर: Sabiha Saba5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़लम को इस लिए तलवार करना
कि बढ़ के ज़ुल्म पर है वार करना

मिली है ज़िंदगी तो हम ने सोचा
हमें कैसा यहाँ किरदार करना

भला पहले ही पत्थर क्यूँ बिछाए
अगर था रास्ता हमवार करना

जहाँ पर माँ को गहरी नींद आई
उसी मिट्टी का है दीदार करना

'सबा' है आज़माइश का तसलसुल
कि दरियाओं पे दरिया पार करना