उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hadson ki duniya mein kaun kis ko rota hai

हादसों की दुनिया में कौन किस को रोता है

حادثوں کی دنیا میں کون کس کو روتا ہے

शायर: Sabiha Saba6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हादसों की दुनिया में कौन किस को रोता है
याद कर के दुख अपने ख़ून दिल का होता है

आमद-ए-बहाराँ पर रोए ख़ूब रोए हम
दर्द यूँ भी थमता है दर्द यूँ भी होता है

आप की निगाहों में वो भी हो गए मुजरिम
जिन की बे गुनाही पर आसमाँ भी रोता है

ख़ाक में मिलीं आख़िर सब रियाज़तें उन की
जागने से क्या होगा जब नसीब सोता है

नक़्श सब्त होते हैं दिल में बे-वफ़ाई के
नाज़ जिन पे करते हैं मान जिन पे होता है

दिल में कितने तूफ़ाँ हैं पुर-सुकून चेहरा है
जाने वो 'सबा' अपने दुख कहाँ समोता है