उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pit karna to humse nibhana sajan humne pahle hi din tha kaha na sajan

पीत करना तो हम से निभाना सजन हम ने पहले ही दिन था कहा ना सजन

پیت کرنا تو ہم سے نبھانا سجن ہم نے پہلے ہی دن تھا کہا نا سجن

शायर: Ibn-e-Insha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पीत करना तो हम से निभाना सजन हम ने पहले ही दिन था कहा ना सजन
तुम ही मजबूर हो हम ही मुख़्तार हैं ख़ैर माना सजन ये भी माना सजन

अब जो होने के क़िस्से सभी हो चुके तुम हमें खो चुके हम तुम्हें खो चुके
आगे दिल की न बातों में आना सजन कि ये दिल है सदा का दिवाना सजन

ये भी सच है न कुछ बात जी की बनी सूनी रातों में देखा किए चाँदनी
पर ये सौदा है हम को पुराना सजन और जीने का अपने बहाना सजन

शहर के लोग अच्छे हैं हमदर्द हैं पर हमारी सुनो हम जहाँ-गर्द हैं
दाग़-ए-दिल मत किसी को दिखाना सजन ये ज़माना नहीं वो ज़माना सजन

उस को मुद्दत हुई सब्र करते हुए आज कू-ए-वफ़ा से गुज़रते हुए
पूछ कर उस गदा का ठिकाना सजन अपने 'इंशा' को भी देख आना सजन