उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul patton ka silsila hoga

फूल पत्तों का सिलसिला होगा

پھول پتوں کا سلسلہ ہوگا

शायर: Deepak Qamar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल पत्तों का सिलसिला होगा
घर हमारा हरा-भरा होगा

जाने वर है कि शाब है कोई
सब में रह के भी वो जुदा होगा

बोझ लगता है दिल पे पर्बत सा
देख कर भी वो चुप रहा होगा

अब इरादों की बाग को खोलें
क़ाफ़िला तो गुज़र गया होगा

चाँद सूरज को छोड़ कर इक दिन
अपने हाथों में इक दिया होगा

जो लगाएगा सोच पर बंधन
बात बे-बात भी ख़फ़ा होगा

तेरी खिड़की में जो चहकता है
वो पखेरू कभी हवा होगा