उर्दू शायरी · ग़ज़ल

andhere mein bala si

अँधेरे में बला सी

اندھیرے میں بلا سی

शायर: Deepak Qamar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अँधेरे में बला सी
उदासी ही उदासी

किसी के तन की ख़ुशबू
फिरे उड़ती हवा सी

मोहब्बत को ज़बाँ दी
ख़मोशी की दुआ सी

वही इंसाँ दरिंदा
मगर सूरत जुदा सी

ये बे-क़ाबू तबीअ'त
लगे प्यारी ख़ता सी

चढ़ी उमड़ी जवानी
नई रुत की घटा सी

खुली ख़्वाहिश की कोंपल
बहुत कमसिन ज़रा सी