उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hilore gungunati baaliyon ke

हिलोरे गुनगुनाती बालियों के

ہلورے گنگناتی بالیوں کے

शायर: Deepak Qamar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिलोरे गुनगुनाती बालियों के
बनाते दाएरे सरगोशियों के

बहुत हैं वार तीखे बिजलियों के
कटेंगे पंख चंचल बदलियों के

अकेले आ गए जाने कहाँ हम
निशाँ मिलते नहीं हैं साथियों के

उफ़ुक़ पे शाम ने पटकी हैं बाँहें
बिखेरे काँच टुकड़े चूड़ियों के

डुबोएँगे नगर को साथ अपने
भँवर दिल में बने हैं बासियों के

छुपा कर ले गए सूरज की किरनें
घनेरे साए गहरी वादियों के

कली दिल की न जाने कब खिलेगी
भरे फूलों से बाज़ू टहनियों के