उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aane wali sadi ke lagte hain

आने वाली सदी के लगते हैं

آنے والی صدی کے لگتے ہیں

शायर: Deepak Qamar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आने वाली सदी के लगते हैं
पंख उजले परी के लगते हैं

बा'द मुद्दत के शहर की छत पर
कुछ सितारे ख़ुशी के लगते हैं

डूबी कश्ती के तैरते चप्पू
हौसले ज़िंदगी के लगते हैं

हाथ ख़ूनी किसी दरिंदे के
पाँव तो आदमी के लगते हैं

कोई चेहरा भी छू नहीं पाते
'अक्स सब आरसी के लगते हैं

यूँ उतरती हैं दिल में वो नज़रें
बोल से ख़ामुशी के लगते हैं

हाथ पे हाथ धर के बैठी शाम
रंग ये बेबसी के लगते हैं