उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul hi phul hain daman-e-shakebai mein

फूल ही फूल हैं दामान-ए-शकेबाई में

پھول ہی پھول ہیں دامان شکیبائی میں

शायर: Urooj Zaidi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल ही फूल हैं दामान-ए-शकेबाई में
आप जाएँ तो ज़रा बात की गहराई में

किसी सन्नाटे का इम्कान-ए-त'आक़ुब भी नहीं
साज़-ए-दिल छेड़ दिया करता हूँ तन्हाई में

हैरत-ए-जल्वा-गरी तुझ को पता हो शायद
किस ने आईने जड़े चश्म-ए-तमाशाई में

जल्वतों ने तो कभी फ़ुर्सत-ए-तामीर न दी
ज़िंदगी ज़िंदगी बन जाएगी तन्हाई में

आप की याद के अंदाज़-ए-रिफ़ाक़त की क़सम
मैं अकेला न रहा 'आलम-ए-तन्हाई में

मौत को दाख़िल-ए-अंदाज़-ए-शिफ़ा-याबी कर
इक इज़ाफ़ा सही ए’जाज़-ए-मसीहाई में

मेरा अफ़्साना-ए-ग़म शौक़ से सुनिए लेकिन
तल्ख़ियाँ भी तो हुआ करती हैं सच्चाई में

इस रविश का भी मैं शाकी तो नहीं हूँ लेकिन
आप कुछ और थे आग़ाज़-ए-शनासाई में

कुछ 'अजब मोड़ मिरी ज़ीस्त में आया है 'उरूज'
मैं न महफ़िल में सुकूँ-याब न तन्हाई में