उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir yaad aa gai kisi shirin-dahan ki baat

फिर याद आ गई किसी शीरीं-दहन की बात

پھر یاد آ گئی کسی شیریں دہن کی بات

शायर: Bano Tahira Sayeed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर याद आ गई किसी शीरीं-दहन की बात
जिस की हर एक बात है शेर-ओ-सुख़न की बात

अंजान बन के हाल-ए-ग़म-ए-दिल न पूछिए
आ जाएगी ज़बान पे ज़ख़्म-ए-कुहन की बात

सुब्ह-ए-बहार लुत्फ़-ए-सुख़न रंग-ए-रू-ए-गुल
हर हुस्न में निहाँ है तिरे बाँकपन की बात

क्यों अंदलीब चुप है सबा माजरा है क्या
गुलशन में हो रही है जो ज़ाग़-ओ-ज़ग़न की बात

दिल्ली बहुत हसीन है दिलकश है लखनऊ
लेकिन ये और ही है हमारे दकन की बात

सुनते रहे ज़माने की कड़वी कड़ी मगर
कहने न पाए 'ताहिरा' हम अपने मन की बात