उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ja rahi hai bahaar phulon ki

जा रही है बहार फूलों की

جا رہی ہے بہار پھولوں کی

शायर: Bano Tahira Sayeed9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जा रही है बहार फूलों की
है क़बा तार तार फूलों की

सींचिए पहले ख़ून-ए-दिल से चमन
देखिए फिर बहार फूलों की

उन के होंटों पे मुस्कुराती है
मुस्कुराहट हज़ार फूलों की

किस क़दर तल्ख़ ये हक़ीक़त है
हम-नशीनी-ए-ख़ार फूलों की

जिस को कहते हैं हम बहार-ओ-ख़िज़ाँ
वो तो है जीत हार फूलों की

सच बता क्यों ख़मोश है बुलबुल
ऐ सबा राज़-दार फूलों की

है ख़िज़ाँ में भी जैसे आवारा
निकहत-ए-बे-क़रार फूलूँ की

क्या क़फ़स में भी गुल खिलाएगी
याद यूँ बार बार फूलों की

'ताहिरा' आज तेरे शे'रों में
है महक बे-शुमार फूलों की