उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-KHabar hun hosh ka aalam nahin

बे-ख़बर हूँ होश का आलम नहीं

بے خبر ہوں ہوش کا عالم نہیں

शायर: Bano Tahira Sayeed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-ख़बर हूँ होश का आलम नहीं
ये भी कुछ उस की इनायत कम नहीं

मेरे होंटों पर तबस्सुम देख कर
क्यों समझते हो कि दिल में ग़म नहीं

शान-ए-ग़म इस में नहीं आँसू बहें
क़हक़हे भी आँसुओं से कम नहीं

जल उठा है दिल में इक ऐसा चराग़
रौशनी जिस की कभी मद्धम नहीं

चश्म-ए-शाइर चश्म है नर्गिस नहीं
इस का हासिल ख़ून है शबनम नहीं

'ताहिरा' जिस में न हो सोज़-ए-दरूँ
सिर्फ़ इक हैवान है आदम नहीं