उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir wahi gham hain wahi tanz zamane wale

फिर वही ग़म हैं वही तंज़ ज़माने वाले

پھر وہی غم ہیں وہی طنز زمانے والے

शायर: Yachana Phansal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर वही ग़म हैं वही तंज़ ज़माने वाले
बाज़ कब आते हैं ये दिल को दुखाने वाले

छोड़ने वाले को दरकार है इक ग़लती की
और निभाते हैं सदा साथ निभाने वाले

'उम्र-भर छाँव में अपनी जिन्हें सींचा तू ने
हैं वही लोग तुझे आग लगाने वाले

इक मुलाक़ात में ही हम को समझ ये आया
लोग छोटे हैं बहुत ऊँचे घराने वाले